2 जनवरी 2023 - 18:45
इस्राईले चरमपंथी मंत्री बिन ग़फ़ीर मस्जिदु अक़सा पर हमले की तैयारी में

इस्राईल की नई गठबंधन सरकार में नेश्नल सेक्युरिटी के मंत्री का पद संभालने के बाद चरमपंथी ज़ायोनी नेता ईतमार बिन ग़फ़ीर ने अपना इरादा ज़ाहिर कर दिया है कि वे इसी हफ़्ते मस्जिदुल अक़सा में घुसेंगे और मीडिया का कहना है कि बिन ग़फ़ीर मंगलवार या बुधवार को यह हरकत करने वाले हैं।

बिन ग़फ़ीर के मंत्री बनते ही चरमपंथी ज़ायोनी संगठन हरकत में आ गए हैं और उन्होंने मस्जिदुल अक़सा पर हमले के लिए उनसे मांग शुरू कर दी है। एक चरमपंथी ज़ायोनी संस्था के वकील अवीआद विसोली ने कहा कि नेश्नल सेक्युरिटी के मंत्री ही पुलिस को निर्देश देंगे कि मस्जिदुल अक़सा के बारे में क्या रुख़ अपनाया जाए।

क़ुदस के मामलों के टीकाकार ज़ियाद अबहीस ने कहा कि चरमपंथी ज़ायोनी संगठनों ने आने वाले दिनों के लिए अपना एजेंडा तैयार कर लिया है और उसे मंत्री को सौंप भी दिया है। उनका कहना था कि वर्ष 2023 मस्जिदुल अक़सा के ख़िलाफ़ संघर्ष का साल साबित हो सकता है। बिन ग़फ़ीर चरमपंथी ज़ायोनी नेता हैं वे मस्जिदुल अक़सा के ज़रिए फ़िलिस्तीन के मुद्दे को हमेशा के लिए ख़त्म कर देने की कोशिश करेंगे। इसलिए ज़रूरी है कि हम मस्जिदुल अक़सा पर ख़ास नज़र रखें और इसी लड़ाई में अपनी पूरी ताक़त लगा दें।

क़ुद्स अंतर्राष्ट्रीय फ़ाउंडेशन ने कहा है कि बिन ग़फ़ीर का एलान ख़तरनाक है वे अलअक़सा के सिलसिले में चरमपंथी ज़ायोनियों का दौर शुरू करना चाहते हैं।

संस्था का कहना है कि बिन ग़फ़ीर ने ठीक उस दिन यह एलान किया है जब उन्हें चरमपंथी ज़ायोनी संगठनों की 11 मांगों पर आधारित पत्र मिला है। संस्था ने चेतावनी दी है कि बिन गफ़ीर इस बार मस्जिदुल अक़सा में जो प्रवेश करना चाहते हैं वह पिछली घटनाओं से अलग होगा। इस बार चरमपंथी ज़ायोनियों की कोशिश यह होगी कि मस्जिदुल अक़सा के सिलसिले में ज़ायोनियों की कस्टडी का दौर शुरु हो जाए। ज़ायोनी कोशिश करेंगे कि मस्जिदुल अक़सा के प्रयोग के समय को इस तरह बांट दें कि ज़ायोनियों को मुसलमानों के इस पवित्र स्थल को इस्तेमाल करने का मौक़ा मिल जाए और उस समय में मुसलमानों का प्रवेश इस मस्जिद में वर्जित कर दिया जाए।

फ़ाउंडेशन का कहना है कि मस्जिदुल अक़सा इस्लामी मस्जिद है जो अल्लाह के ख़ास इरादे से बनी है यह 14 शताब्दियों की इस्लामी सभ्यता की प्रतीक है। बिन ग़फ़ीर, शेरोन या किसी को भी यह हक़ नहीं पहुंचता कि इस सच्चाई को बदलने की कोशिश करें।

संस्था ने फ़िलिस्तीनियों से अपील कर दी है कि वे मस्जिदुल अक़सा की ओर कूच करें और मंगलवार, बुधवार और गुरुवार को मस्जिद में एकत्रित हो जाएं।

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